Wednesday, February 21, 2024
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पटाखा कांड के बाद जिला प्रशासन नहीं दिख रहा है गंभीर, अफसरों की लापरवाही से इससे जुड़े कारोबारियों के है हौसले बुलंद..

झरिया(JHARIYA) 31 वर्ष पूर्व 1992 के 25 अक्टूबर दीपावली के दिन शाम चार बजे झरिया सिंदुरिया पट्टी स्थित कल्लू पटाखा दुकान में भीषण आग लगी थी. इस हादसे में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई थी. लगभग एक सौ से अधिक लोग जख्मी हो गये थे.

हालांकि सरकारी आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 29 व घायलों की संख्या 50 बताई गई थी. इस घटना की दास्तान स्थानीय लोग अभी भी भूल नहीं पाते.

आश्चर्य की बात यह है कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जिला प्रशासन की ओर से पटाखे की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाई है।

बावजूद पटाखा व्यवसाय के लोग जिला प्रशासन को खुलेआम चुनौती देकर झरिया शहर के दुकानदार थोक और खुदरा भाव में झरिया शहर की घनी आबादी वाले इलाके बोरा पट्टी, बर्तन पट्टी, सब्जी पट्टी, खैनी पट्टी, ऊपर कुल्ही, लक्ष्मीनिया मोड़, बाटा मोड़, मेन रोड, गांधी रोड और झरिया-धनबाद रोड के किनारे दुकानों में धड़ल्ले से पटाखे बेच रहे हैं।

झरिया चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अमित साहू उर्फ दीपू ने बताया कि पटाखा कांड के बाद जिला प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है।

अफसरों की लापरवाही से इससे जुड़े कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं और वे थोड़े से फायदे के लिए आम लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं।

शहर के कई इलाकों में बारूद का कारोबार तेजी से फलने फूलने लगा है। झरिया शहर बारूद की ढेर पर किसी तरह की लापरवाही हुई तो झरिया शहर में फिर एक बड़ा हादसा हो सकता है।

ऐसे भी दुकान हैं जिनके पास लाइसेंस नहीं है और झरिया शहर में एक ही लाइसेंस में तीन तीन दुकान चला रहे हैं।

प्रशासन जांच करें और घनी आबादी में बेच रहे पटाखा दुकानों पर कार्रवाई करें। झरिया मारवाड़ी सम्मेलन ट्रस्ट के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने कहा कि घटना के बाद आठ साल तक झरिया में पटाखा बिक्री पर रोक लग गयी थी. वर्ष 2000 के बाद लाइसेंस निर्गत होने पर पटाखा दुकानें चालू हुई थीं. लेकिन आज बहुत ऐसे दुकान है जो बिना लाइसेंसी हैं. आज भी पटाखा कांड को याद कर झरिया वासियों का दिल दहल जाता है।

NEWS ANP के लिए कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट.

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